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इस साल उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने के लिए नहीं बनेगा पीपा पुल

बलिया टॉप न्यूज़, बलिया: बिहार से उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले पीपा पल को इस साल नहीं बनाया जायेगा. हल्दिया से वाराणसी जल मार्ग  शुरू होने के कारण इस वर्ष गंगा नदी में किसी प्रकार का अवरोध ना हो इस लिए यह फैसला सरकार द्वारा लिया गया  है. बताया जा रहा है कि नावों के आवागमन के लिए कम से कम 45 फीट का रास्ता चाहिए. इस कारण यह लगभग तय हो चुका है कि इस बार गंगा नदी पर पीपा पुल नहीं बनेगा. गंगा नदी में पीपा पुल निर्माण पर संकट के बादल देख दोनों किनारों पर बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गयी है. छह माह तक बाढ़ से जंग लड़ते हुए जान हथेली पर रखकर नाव से नदी पार करने वाले लोगों को पुल बनने का बेसब्री से इंतजार रहता है. अधिकांश लोग शादी-ब्याह की तिथि भी उसी हिसाब से निर्धारित करते है ताकि नाते-रिश्तेदारों को आने-जाने में किसी प्रकार की दिक्कत न आने पाये. इस बार नदी पार बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गयी है. लोगों का कहना है कि नदी के उत्तर बसे गांवों अथवा दक्षिण के लोगों को गाड़ी से आने-जाने के लिये बिहार के बक्सर के रास्ते आना-जाना पड़ेगा. अगर पीपा पुलों का निर्माण नहीं होता है तो दोनों ओर के लोगों को सात फेरा लेने से पहले 70 कोस की परिक्रमा करनी होगी.

नदी के दोनों तरफ यूपी-बिहार के सैकड़ों गांव बसे हुए है. नदी के उत्तर व दक्षिण बसे गांवों के बीच ही अन्य इलाकों के लोगों का आपस में रिश्ता तय होता है. दो राज्यों के होने के बावजूद अधिकांश नाते- रिश्तेदारियां एक-दूसरे के यहाँ हैं. आम तौर पर छह माह लोग नाव से आते-जाते है, लेकिन अक्तूबर अथवा नवम्बर के बाद शिरामपुर, नौरंगा तथा हल्दी के सामने महुली तथा लालगंगज के सामने महुली घाट पर पीपा पुल बनने के बाद उनकी राह आसान हो जाती थी. नदी पार के लोग अपने घरों में शादी-ब्याह का वक्त भी आम तौर पर नवम्बर के बाद ही रखते है. ऐसा इसलिये किया जाता है कि ताकि मेहमानों व बारात को आने-जाने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो सके. हालांकि इस बार ऐसा नहीं हो सकेगा और लोगों को सात फेरों के लिए 70 कोस की परिक्रमा करनी होगी.

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